HomeGlobal News

Holi kyo Manaya jata hai | Holi ki history hindi me

नमस्कार दोस्तों, इस Post में मैं आपको बताने वाला हूं की ” Holi kyo Manaya jata hai ” और इसे मनाने के पीछे क्या कारण है भारत में होली का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है वैसे तो यह हिंदुओं का त्यौहार है लेकिन इसको लगभग हर धर्म के लोग मनाते हैं लेकिन बहुत से लोग यह नहीं जानते हैं कि यह त्यौहार क्यों मनाया जाता है और इसका इतिहास क्या है अगर आप भी उन्ही में से एक हैं तो इस Post को ध्यान से आखिर तक पढ़िए क्योंकि इसमें हमने होली के बारे में विस्तार से बताया है.

Holi kyo Manaya jata hai | Holi ki history hindi me

Holi kyo Manaya jata hai ?

दोस्तों शिवपुराण में लिखी हुई एक कथा के अनुसार हिमालय की पुत्री पार्वती भगवान शिव से विवाह करने के लिए तपस्या कर रही थी लेकिन शिव अपनी ही तपस्या में लीन थे जब इंद्र ने यह देखा तो उन से रहा ना गया वह चाहते थे कि शिव और पार्वती का विवाह हो जाए और शिव के पुत्र के हाथ से तारकासुर का वध हो, इसी वजह से इंद्र ने कामदेव को शिवजी की तपस्या भंग करने के लिए भेजा लेकिन भगवान शिव ने क्रोधित होकर अपनी तीसरी आंख से कामदेव को ही भस्म कर दिया.

भगवान शिव की तपस्या भंग होने के बाद सभी देवी-देवताओं ने उनके क्रोध को शांत किया और उनको पार्वती से विवाह करने के लिए मना लिया इस कथा के अनुसार होली में काम की भावना को जलाकर सच्चे प्रेम की जीत का उत्सव मनाया जाता है.

होली के त्योहार से बहुत सी पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं उनमें से एक सबसे लोकप्रिय कथा है जो मैं अब आपको बता रहा हूं प्राचीन समय में हिरण्यकश्यप नाम का एक बहुत बलशाली राक्षस हुआ करता था जिसको ब्रम्हदेव ने वरदान दिया था कि उसे कोई भी इंसान या जानवर नहीं मार सकता, ना ही किसी अस्त्र से ना ही शस्त्र से, ना घर के बाहर ना घर के अंदर, ना ही दिन में नहीं रात में, नहीं धरती पर नहीं आकाश में, ऐसी शक्तियां पाकर वह बहुत ज्यादा घमंड करने लगा था और खुद को भगवान से भी बड़ा समझने लगा था. वह अपने राज्य के लोगों पर अत्याचार किया करता था और उन सभी को भगवान विष्णु की पूजा करने से रोकता था.

हिरण्यकश्यप का एक पुत्र भी था जिसका नाम प्रहलाद था लेकिन वह अपने पिता की बात ना मानकर भगवान विष्णु की पूजा किया करता था और यह बात हिरण्यकश्यप को बिल्कुल भी पसंद नहीं थी उसने बहुत कोशिश किया कि उसका पुत्र भगवान विष्णु की भक्ति करना छोड़ दें लेकिन वह असफल हो जाता था इसलिए उसने अपने पुत्र को मारने का फैसला किया.

प्रहलाद को मारने के लिए हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से सहायता मांगी. होलिका को भी ब्रह्मा जी ने वरदान दिया था जिसमें उसको एक वस्त्र मिला था जब तक होलीका के तन पर वह वस्त्र रहेगा तब तक उसको कोई भी नहीं जला सकता था. हिरण्यकश्यप ने अपने षड्यंत्र में होलिका को शामिल किया और उसको आदेश दिया कि वह प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठ जाए उसने सोचा कि आग में होलीका तो जल नहीं सकती क्योंकि उसको वरदान मिला है लेकिन उसका पुत्र प्रहलाद उस आग में जलकर भस्म हो जाएगा.

इसके बाद होलीका प्रहलाद को लेकर आग में बैठ गई. भगवान विष्णु सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं भगवान ने अपनी शक्ति से वहां पर ऐसा तूफान भेजा की होलिका के ऊपर से वह मायावी वस्त्र उड़ गया और वह आग में जलने लगी और भस्म हो गई वहीं दूसरी तरफ प्रहलाद को आग से कोई भी नुकसान नहीं हुआ और इस तरह बुराई पर अच्छाई की जीत हुई उस दिन से आज तक लोग इस दिन को होलिका दहन के रूप में मनाते हैं.

होली को ठीक तरह से कैसे मनाते हैं ?

  • दोस्तों पहले होली के रंगों को प्राकृतिक तरीकों से बनाया जाता था लेकिन आजकल इन्हें chemicals का इस्तेमाल करके बनाया जाता है जो कि हमारी त्वचा और सेहत के लिए बहुत हानिकारक साबित हो सकते हैं इसलिए इन रंगों का इस्तेमाल ना करें और अपने परिवार और दोस्तों को भी इसके बारे में सूचित करें.
  • होली खेलने से पहले अपनी त्वचा और बालों में तेल जरूर लगाएं ताकि वह नहाते वक्त आसानी से छूट जाएं.
  • अगर आप अस्थमा (Asthma) से पीड़ित हैं तो होली खेलते वक्त Face Mask का उपयोग करें.
  • अगर होली खेलने के बाद आपको कोई भी शारीरिक परेशानी हो तो अपने नजदीकी अस्पताल में जाकर check up करवाएं.

 

दोस्तों आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं ! मुझे उम्मीद है कि आपको यह Article ” Holi kyo Manaya jata hai ” पसंद आया होगा अगर आपको यह अच्छा लगा हो तो इसको अपने दोस्तों के साथ ज्यादा से ज्यादा share करें और अगर आपके मन में कोई सवाल हो तो अपने विचारों को comments करने में बिल्कुल भी संकोच ना करें !

Comments (1)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.