December 16, 2016

महात्मा गांधी का जीवन Biography of Mahatma Gandhi

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आजादी की लड़ाई मे हजारो देशप्रेमियों ने अपना योगदान दिया और इन्हीं मे एक ऐसा अनोखा
सख्स वह है जो धोती कुर्ता पहने हाथ मे लाठी लिये तथा चेहरे पर मुस्कान बिना शस्त्र हमारी आजादी के लिये निस्वार्थ भाव से लड़ा हम मे से कई लोग उन्हें राष्ट्र पिता कहकर पुकारते है। कई उन्हें बापू कहते है तथा कई mahatma gandhi के नाम से जानते है।
आज हम आप को Mahatma Gandhi के जीवन के बारे मे बताते है। वैसे तो गांधी जी का देहांत बहुत वर्ष पूर्व हो चुका है लेकिन आज भी लोग उन्हें अपना पथप्रदशक (idol) मानते है तथा उनके बताये सिद्धान्तों का अनुशरण अपने जीवन की दिशा निर्धारित करते है।
महात्मा गांधी का जन्म और माता-पिता
महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहन दास करमचंद गांधी है। उनका जन्म 2 october 1869 को गुजरात मे स्थित काठियावाड़ के पोरबंदर नामक गांव मे हुआ था। उनकी माता का नाम पुतलीबाई तथा पिता का नाम करमचंद गांधी था।
आप मे से बहुत कम लोग जानते होंगे ब्रिटिशों के समय मे वे काठियावाड़ के छोटी सी रियासत के दीवान थे। उनकी माता पुतलीबाई उनके पिता की चौथी बीवी थी वह बहुत धार्मिक स्वभाव की थी। उनके माता के साथ रहते हुए उनमे दया, प्रेम तथा ईश्वर के लिये निश्वार्थ श्रद्धा के भाव बचपन मे ही जागृत हो चुके थे। जिनकी छवि महात्मा गांधी मे अंत तक दिखती रही।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा (early life and education)

गांधी जी की प्रथमिक शिक्षा काठियावाड़ मे ही हुई थी, तथा उनका विवाह 14 वर्ष की आयु मे कस्तूरबा माखनजी से हो गया। शायद आप नही जानते होंगे की गांधी जी अपनी पत्नी से 1 वर्ष छोटे थे।
जब वह 19 वर्ष के हुए तो उच्च शिक्षा हेतु london चले गए। विदेश में Gandhi Ji ने कुछ अंग्रेजी रीति रिवाज़ों का अनुसरण तो किया पर वहाँ के मांसाहारी खाने को नहीं अपनाया। सन 1893 मे वे south africa की एक भारतीय फर्म मे वकालत के लिए चले गए। जहां उन्हें भारतीयों से होने वाले भेदभाव की प्रताड़ना सहनी पड़ी। उसके पश्चात ही उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा भारत में हो रहे अत्याचार के विरुद्ध तथा अपने देशवासियों के हित में प्रश्न उठाने आरम्भ किये। 1906 मे गांधी जी दक्षिण अफ्रीका मे ही थे जब उन्होंने जुलू युद्ध मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बाद 1915 मे वो हमेशा के लिए अपने देश लौट आये। उस समय भारत मे हर तरफ अंग्रेजो द्वारा अत्याचार हो रहा था, देश मे चारो तरफ गरीबी छा गयी थी। सभी गाँवो गन्दगी तथ बीमारी फैल रही थी। यहीं से Gandhi Ji की आज़ादी में महत्वपूर्ण भूमिका प्रारम्भ हो गयी।

अपना पहला आश्रम खेड़ा गांव मे बनाया। ( kheda gaun ashram)


गुजरात के खेड़ा गांव मे आश्रम बनाया तथा उनके समर्थकों ने उस गाँव की सफाई की और विद्यालय व अस्पतालों का निर्माण किया। वहाँ गांधी जी को सत्याग्रह करने के कारण गिरफ्तार भी किया गया। गांधी जी के समर्थको ने  ओर हजारों लोगों ने रैलियां निकली व फलस्वरूप बिना किसी शर्त के उन्हे रिहा कर लिया गया। अंग्रेजो और जमींदारों ने मिलकर जो किसानों तथा ग़रीबों का शोषण किया गया था। उसका भी जमकर विरोध किया गया। जिनका मार्गदर्शन गांधी जी ने स्वयं किया। खेड़ा तथा चम्पारन मे सत्याग्रह को खूब सफलता मिली और गांधी जी पूरे देश के बापू बन गए।

गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन (non co-operative movement)


खेड़ा गाँव को अंग्रेज़ों से मुक्त कराने के बाद गांधी जी ने पूरे देश में जनता के हित के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध में एक जंग शुरू कर दी। जिसमें उनके मुख्य हथियार थे- सत्य, अहिंसा व शांति (Truth, Non-violence and Peace)। गांधी जी द्वारा ये आंदोलन अंग्रेजों के खिलाफ ब्रह्मास्त्र साबित हुआ।
गांधी जी द्वारा विदेशी वस्तुओँ का बहिष्कार। (Boycott of Foreign Goods)

1921 मे गांधी जी भारतीय कांग्रेस में शामिल हुऐ फिर उन्होंने स्वदेशी नीति अपनाते हुए विदेशी वस्तुओँ का बहिष्कार करने के लिए लोगों को प्रेरित किया, लोगों से खादी पहनने के लिए आग्रह किया तथा महिलाओ को भी इस आंदोलन मे हिस्सा लेने के लिए कहा। जो लोग अंग्रेजों के लिए काम करते थे तथा उनकी सरकारी नौकरी कर रहे थे। उनसे भी काम छोडने के लिए कहा।

असहयोग आंदोलन वापस लिया गया (Non-Cooperation Movement was withdrawn)


इस आंदोलन को पूरे देश मे सफलता प्राप्त हुई तथा अधिकतम लोगों ने इसका अनुसरण किया। दुर्भाग्यवश चौरी चौरा के हिंसात्मक काण्ड के बाद गांधी जी को असहयोग आन्दोलन को वापस लेना पड़ा तथा उन्हें 2 साल कारावास में भी व्यतीत करना पड़ा। उन्हें रिहाई फरबरी 1924 में मिली।
गांधी जी द्वारा नमक सत्याग्रह- दान्ड़ी यात्रा ( salt styagrah dandi march)

गिरफ्तारी के बाद भी गांधी जी देश मे हो रहे तरह-तरह के हींसा व अत्याचारों को रोकने के लिए प्रयास करते रहे। उनके कारावास के दौरान दो भागों में बंट चुकी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को भी उन्होंने एक करने का हर संभव प्रयास किया। इसके बाद Mahatma Gandhi ने 1930 में नमक पर लगे कर (Tax) के विरुद्ध सत्याग्रह आन्दोलन प्रारम्भ किया, जिसमें दांडी यात्रा (Dandi March) प्रमुख रही।
दलितों के लिए आंदोलन (Started Movement for Dalits)

सन 1932 मे गांधी जी ने 6 दिन का अनशन किया तथा दलितों के हित मे आंदोलन शुरु किया परंतु वह सफल नही हुआ तथा दलितों ने गांधी जी को नकार दिया और अम्बेडकर को अपना नेता चुना। उसके बाद भी गांधी जी उनके समर्थन मे लडते रहे।
भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया (Quit India Movement)

इस सर्वव्यापी आंदोलन मे हिंसा तथा गिरफ्तारी भी हुई जिसके पक्ष मे बापू कतई नही थे। गांधी जी ने सम्पूर्ण भारत को अहिंसा से करो या मरो के लिए प्रेरित किया। गांधी जी तथा उनके समर्थको को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया गांधी जी के लिए कारावास बहुत घातक सिद्ध हुआ। इस समय वह बीमार भी हुए तथा कस्तूरबा का भी देहांत हो गया। गांधी जी के कारावास मे रहते हुए भी भारत छोड़ो आंदोलन  चलता रहा और सफल हुआ। आखिरकार अंग्रेजों ने भारत को सत्ता सौंपने का निर्णय लिया परंतु गांधी जी ने कांग्रेस को अंग्रेजों द्वारा दिया गया प्रस्ताव ठुकराने को कहा क्योंकि यह प्रस्ताव भारत को विभाजन की ओर ले जा रहा था। परंतु हिंदू और मुस्लिमों मे हो रहे झगडों के कारण उन्होंने दिल्ली मे आमरण अनशन किया तथा अंत मे पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपय देकर अलग कर दिया।

गांधी जी की हत्या हुई (Mahatma Gandhi’s Death)


गांधी जी की हत्या नाथुराम गोडसे ने की थी। वह राष्ट्रवादि हिन्दू था तथा गांधी जी को भारत को कमजोर करने के लिए दोषी मानता था। क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये दिए थे।
30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिरला भवन मे रात्रि के समय मे नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। नवम्बर 1949 मे नाथूराम गोडसे को फांसी दे दी गयी।
दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल | आंधी में भी जलती रही गांधी तेरी मशाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल |

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